प्रवाल भित्तियाँ अत्यधिक उत्पादक समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र हैं, जिनका निर्माण प्रवाल पॉलीप्स द्वारा होता है। ये पॉलीप्स जूज़ैंथेली शैवाल के साथ सहजीवी संबंध में रहते हैं। वैश्विक तापन इस नाजुक प्रवाल जीवन तंत्र के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में उभरा है।
ऊष्मीय तनाव
शैवाल निष्कासन
प्रवाल विरंजन
कार्बोनेट आयन में कमी
कमजोर कैल्सीकरण
कमजोर कंकाल
जैव विविधता में कमी
मछलियों की हानि
भित्ति क्षरण
वैश्विक तापन प्रवाल भित्तियों को मुख्यतः समुद्री सतह के तापमान में वृद्धि के माध्यम से प्रभावित करता है। ऊष्मीय तनाव के कारण प्रवाल अपने सहजीवी जूज़ैंथेली शैवाल को बाहर निकाल देते हैं, जिससे प्रवाल विरंजन होता है। यदि उच्च तापमान लंबे समय तक बना रहे, तो प्रवाल मर भी सकते हैं। इसके उदाहरण ग्रेट बैरियर रीफ, लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार की प्रवाल भित्तियों में देखे गए हैं।
वैश्विक तापन महासागरीय अम्लीकरण को भी बढ़ाता है, जिससे कार्बोनेट की उपलब्धता घटती है और प्रवालों के कंकाल निर्माण की प्रक्रिया कमजोर होती है। यह रीफ खाद्य शृंखलाओं को बाधित करता है, मछलियों के प्रजनन स्थलों को कम करता है, रोग-संवेदनशीलता बढ़ाता है और समुद्री जैव विविधता को नुकसान पहुँचाता है। प्रवाल भित्तियों की हानि से तटीय सुरक्षा, पर्यटन और मत्स्य-आधारित आजीविका भी कमजोर होती है।
इस प्रकार, वैश्विक तापन प्रवाल जीवन तंत्र के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि यह प्रवाल विरंजन, कमजोर कैल्सीकरण और जैव विविधता हानि का कारण बनता है। इनके संरक्षण के लिए जलवायु कार्रवाई, समुद्री संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण आवश्यक हैं।