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UPSC
GS-4 • 2024
10 marks • 150 words

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10 Marks • 150 Words
“कानून के अनुसार, यदि मनुष्य दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करता है तो वह दोषी है। नीतिशास्त्र के अनुसार, यदि वह केवल ऐसा करने के बारे में सोचता है तो वह दोषी है।” — इमैनुएल कांट(उत्तर 150 शब्दों में दीजिये)
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Syllabus: Essence of ethics in human actions. 10 marks 150 words 7 min focus timer
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HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

इमैनुएल कांट का यह कथन वैधानिक दोष और नैतिक दोष के बीच अंतर को स्पष्ट करता है। कानून मुख्य रूप से बाहरी कार्यों का मूल्यांकन करता है, जबकि नीतिशास्त्र आंतरिक इरादे, उद्देश्य, अंतरात्मा और नैतिक इच्छा का मूल्यांकन करता है। इस प्रकार, कानून यह देखता है कि व्यक्ति क्या करता है, जबकि नीतिशास्त्र यह देखता है कि व्यक्ति कैसा है और क्या बनने का इरादा रखता है।

मुख्य भाग: कानून, नीतिशास्त्र और नैतिक इरादा

फ्लो चार्ट: कानून और नीतिशास्त्र में दोष का आधार

मानवीय आचरण

कानून

बाहरी आचरण
अधिकारों का उल्लंघन
नियम + दंड

नीतिशास्त्र

आंतरिक इरादा
मूल्य + अंतरात्मा
नैतिक जिम्मेदारी

साझा उद्देश्य: न्यायपूर्ण, सुव्यवस्थित, मानवीय और सतत समाज। 

विश्लेषणात्मक उत्तर

कांट का विचार वैधानिकता और नैतिकता के बीच अंतर पर आधारित है। कानून में दोष सामान्यतः तब उत्पन्न होता है जब कोई व्यक्ति ऐसा कार्य करता है जो दूसरे के अधिकारों का उल्लंघन करता है, जैसे चोरी, आक्रमण, धोखाधड़ी या भ्रष्टाचार। केवल विचार सामान्यतः दंडनीय नहीं होता, क्योंकि कानून को प्रमाण, कार्य और सामाजिक हानि की आवश्यकता होती है।

नीतिशास्त्र इससे अधिक गहराई में जाता है। यह आचरण के पीछे के इरादे का मूल्यांकन करता है। कानून मनुष्य के बाहरी आचरण को नियंत्रित और सुधारने के लिए बनाया गया है, जबकि नीतिशास्त्र व्यक्ति के आंतरिक पक्षों—जैसे इरादा, सोच, विश्वास, दृष्टिकोण और अंतरात्मा—को परिष्कृत करने के लिए होता है। दोनों का उद्देश्य न्यायपूर्ण, सुव्यवस्थित और मानवीय समाज की स्थापना करना है।

कानून नियमों, दंड और संस्थागत प्रवर्तन के माध्यम से गलत कार्यों को सुधारता है, जबकि नीतिशास्त्र व्यक्ति के मूल्यों, नैतिकता और अंतरात्मा को आकार देकर गलत कार्यों को रोकता है। इस प्रकार, कानून बाहर से व्यवहार को नियंत्रित करता है, जबकि नीतिशास्त्र व्यक्ति को भीतर से रूपांतरित करता है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई लोक सेवक केवल दंड के भय से रिश्वत नहीं लेता, तो वह कानूनी रूप से निर्दोष हो सकता है, लेकिन नैतिक रूप से कमजोर है। इसी प्रकार, यदि कोई विद्यार्थी नकल करने की योजना बनाता है, लेकिन उसे लागू नहीं कर पाता, तब भी उसने नैतिक स्तर पर ईमानदारी का उल्लंघन किया है। इसलिए नैतिक दोष गलत इरादे के स्तर से ही शुरू हो जाता है।

निष्कर्ष

अतः कांट सही रूप से स्पष्ट करते हैं कि नैतिकता मात्र कानूनी अनुपालन से अधिक गहरी है। वास्तव में नैतिक व्यक्ति गलत कार्य केवल कानून के भय से नहीं, बल्कि कर्तव्य, अंतरात्मा और मानवीय गरिमा के सम्मान के कारण नहीं करता। कानून बाहरी व्यवस्था बनाता है, जबकि नीतिशास्त्र आंतरिक नैतिक चरित्र का निर्माण करता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

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