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GS-4 • 2025
15 marks • 250 words

GS-4 • 2025

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15 Marks • 250 Words
मूल्य को परिभाषित करते हुए; मानवीय मूल्यों के विभेदक लक्षणों तथा इन मूल्यों के संवर्द्धन में परिवार की भूमिका की व्याख्या कीजिए।
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Syllabus: Lessons from the lives and teachings of great leaders. 15 marks 250 words 7 min focus timer
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Model Answer Framework
हिंदी मॉडल उत्तर
HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

मूल्य वे आंतरिक मानदंड, आदर्श और विश्वास हैं, जो व्यक्ति के विचारों, व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक संबंधों को दिशा देते हैं। ये बताते हैं कि व्यक्ति के लिए क्या उचित-अनुचित, अच्छा-बुरा और वांछनीय-अवांछनीय है।

मानवीय मूल्य जैसे सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, करुणा, सहिष्णुता, न्याय, सहयोग और कर्तव्यनिष्ठा व्यक्ति को नैतिक, संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनाते हैं। इन मूल्यों के संवर्द्धन में परिवार की भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि मूल्य-शिक्षा की पहली पाठशाला परिवार ही होता है।

मुख्य भाग: मानवीय मूल्यों की विशेषताएँ और परिवार की भूमिका

फ्लो चार्ट: मूल्यों का निर्माण और संवर्द्धन

परिवार

संस्कार

प्रेम, अनुशासन,
सम्मान और सहयोग
का विकास

मानवीय मूल्य

सत्य, करुणा,
ईमानदारी, सहिष्णुता
और न्याय

व्यक्तित्व निर्माण

नैतिक व्यक्ति,
संवेदनशील समाज
और जिम्मेदार नागरिक

मुख्य विचार: परिवार मूल्य-निर्माण की पहली और सबसे प्रभावी संस्था है। 

1. मूल्य की परिभाषा

मूल्य वे नैतिक एवं सामाजिक मानदंड हैं, जिनके आधार पर व्यक्ति अपने आचरण, निर्णय और जीवन-लक्ष्यों को निर्धारित करता है। ये व्यक्ति को केवल सफल नहीं, बल्कि सार्थक, नैतिक और समाजोपयोगी जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं।

उदाहरण के लिए सत्य व्यक्ति को ईमानदार बनाता है, करुणा उसे संवेदनशील बनाती है, न्याय उसे निष्पक्ष बनाता है और सहिष्णुता उसे विविधता के साथ जीना सिखाती है।

2. मानवीय मूल्यों की विभेदक विशेषताएँ

  • नैतिक प्रकृति: मानवीय मूल्य व्यक्ति को उचित-अनुचित और सही-गलत का बोध कराते हैं।

  • सार्वभौमिकता: सत्य, अहिंसा, करुणा और न्याय जैसे मूल्य सभी समाजों में आदरणीय माने जाते हैं।

  • मानव-केंद्रितता: ये मूल्य मानव गरिमा, सहानुभूति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देते हैं।

  • व्यवहार-निर्देशक भूमिका: मूल्य व्यक्ति के निर्णयों, आचरण और संबंधों को दिशा देते हैं।

  • सामाजिक समरसता: सहयोग, सहिष्णुता और परस्पर सम्मान समाज में शांति और एकता बनाए रखते हैं।

3. मूल्यों के संवर्द्धन में परिवार की भूमिका

परिवार व्यक्ति के समाजीकरण की पहली संस्था है। बालक सबसे पहले परिवार में ही प्रेम, अनुशासन, सहयोग, सम्मान, त्याग, सहानुभूति और जिम्मेदारी जैसे मूल्यों को सीखता है।

  • अनुकरण द्वारा सीखना: बच्चे माता-पिता और बुजुर्गों के व्यवहार से मूल्य सीखते हैं।

  • संस्कारों का विकास: परिवार भाषा, संस्कृति, परंपरा और नैतिक आचरण का आधार देता है।

  • भावनात्मक सुरक्षा: प्रेम और विश्वास का वातावरण संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करता है।

  • अनुशासन और जिम्मेदारी: परिवार कर्तव्य, समय-पालन और आत्म-नियंत्रण की भावना विकसित करता है।

  • सामाजिक दृष्टिकोण: परिवार व्यक्ति को दूसरों के अधिकारों, जरूरतों और भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है।

वर्तमान संदर्भ में प्रासंगिकता

आज उपभोक्तावाद, तकनीकी व्यस्तता, एकल परिवारों की वृद्धि और नैतिक मूल्यों के क्षरण के कारण परिवार की भूमिका और अधिक महत्त्वपूर्ण हो गई है। यदि परिवार में संवाद, प्रेम, अनुशासन और नैतिक वातावरण बना रहे, तो बच्चे संवेदनशील, सहिष्णु और जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होते हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार, मूल्य व्यक्ति के नैतिक जीवन, सामाजिक व्यवहार और व्यक्तित्व निर्माण की आधारशिला हैं। मानवीय मूल्य व्यक्ति को केवल अधिकारों के प्रति नहीं, बल्कि कर्तव्यों, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति भी जागरूक बनाते हैं।

इन मूल्यों के संवर्द्धन में परिवार की भूमिका सबसे महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार ही वह प्रथम संस्था है जहाँ व्यक्ति नैतिकता को केवल पढ़ता नहीं, बल्कि व्यवहार में जीना सीखता है।

मुख्य विचार: मूल्य व्यक्ति को अच्छा मनुष्य बनाते हैं और परिवार इन मूल्यों की पहली प्रयोगशाला है।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies -4 (Ethics) → Human Values
सामान्य अध्ययन -4 (नीतिशास्त्र) → मानवीय मूल्य
Lessons from the lives and teachings of great leaders.
महान नेताओं के जीवन और उपदेशों से शिक्षा।
Asked in: 2025 (1 PYQ)
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