जर्मनी का एकीकरण वह प्रक्रिया थी, जिसके माध्यम से अनेक जर्मन-भाषी राज्यों को प्रशा के नेतृत्व में 1871 में एक जर्मन साम्राज्य के रूप में संगठित किया गया। यह 19वीं शताब्दी के यूरोपीय इतिहास की सबसे महत्त्वपूर्ण घटनाओं में से एक थी।
एक स्तर पर यह राष्ट्रवाद के आदर्श का प्रतीक था, क्योंकि जर्मन-भाषी जनता सांस्कृतिक एकता, राजनीतिक एकीकरण और राष्ट्रीय पहचान चाहती थी। लेकिन दूसरे स्तर पर यह यथार्थवादी राजनीति, कूटनीति, युद्धों और शक्ति-राजनीति के माध्यम से ऑटो वॉन बिस्मार्क के नेतृत्व में प्राप्त किया गया। इसलिए जर्मनी का एकीकरण राष्ट्रवाद के नैतिक आदर्श और शक्ति-राजनीति की व्यावहारिक वास्तविकताओं के बीच अंतर्विरोध का प्रतीक बन गया।
जॉलवेराइन, 1834
व्यापारिक एकीकरण
प्रशा का प्रभाव
1848 की फ्रैंकफर्ट संसद
संवैधानिक दृष्टि
नीचे से प्रयास असफल
कूटनीति + युद्ध
डेनमार्क, ऑस्ट्रिया
और फ्रांस से युद्ध
राष्ट्रवाद का अर्थ है—साझा इतिहास, भाषा, संस्कृति, भू-क्षेत्र और राजनीतिक आकांक्षाओं के आधार पर लोगों में एकता की भावना। जर्मनी के संदर्भ में राष्ट्रवाद खंडित जर्मन-भाषी राज्यों को एक राष्ट्र में संगठित करने की आकांक्षा के रूप में उभरा।
1815 की वियना कांग्रेस के बाद जर्मनी 39 राज्यों के एक शिथिल जर्मन परिसंघ में विभाजित था। बुद्धिजीवियों, छात्रों, मध्यवर्ग और उदारवादियों ने राष्ट्रीय एकता, संवैधानिक शासन और नागरिक अधिकारों की मांग की। इसलिए प्रारंभिक जर्मन राष्ट्रीय आंदोलन का स्वरूप उदारवादी, लोकतांत्रिक और आदर्शवादी था।
आर्थिक मार्ग: 1834 के जॉलवेराइन ने जर्मन राज्यों में आर्थिक एकता स्थापित की और ऑस्ट्रिया की भूमिका को कम करते हुए प्रशा के प्रभाव को बढ़ाया।
उदार-लोकतांत्रिक मार्ग: 1848 की फ्रैंकफर्ट संसद ने संवैधानिक जर्मनी बनाने का प्रयास किया, परंतु सैन्य शक्ति के अभाव और राजतंत्रों के विरोध के कारण वह असफल रही।
प्रशियाई मार्ग: उदारवादी राष्ट्रवाद की असफलता के बाद बिस्मार्क के नेतृत्व में प्रशा ने “रक्त और लौह” की नीति अपनाई, जिसमें सैन्य शक्ति और कूटनीति को प्राथमिकता दी गई।
कूटनीतिक मार्ग: बिस्मार्क ने प्रत्येक युद्ध से पहले अपने विरोधियों को अलग-थलग किया और यह सुनिश्चित किया कि कोई बड़ी यूरोपीय शक्ति प्रशा के विरुद्ध एकजुट न हो सके।
सैन्य मार्ग: डेनमार्क, ऑस्ट्रिया और फ्रांस के विरुद्ध तीन युद्धों ने जर्मन एकीकरण की प्रक्रिया को पूरा किया।
ऑटो वॉन बिस्मार्क का मानना था कि जर्मन एकता केवल भाषणों, प्रस्तावों और उदारवादी बहसों से प्राप्त नहीं की जा सकती। उसने Realpolitik अर्थात यथार्थवादी राजनीति की नीति अपनाई, जिसका अर्थ है—नैतिक आदर्शों के स्थान पर शक्ति, राष्ट्रीय हित, कूटनीति और सैन्य बल पर आधारित व्यावहारिक राजनीति।
डेनिश युद्ध, 1864: प्रशा और ऑस्ट्रिया ने डेनमार्क को पराजित कर श्लेसविग और होल्स्टीन पर नियंत्रण प्राप्त किया।
ऑस्ट्रो-प्रशियन युद्ध, 1866: प्रशा ने ऑस्ट्रिया को पराजित किया, उसे जर्मन मामलों से बाहर किया और 1867 में उत्तर जर्मन परिसंघ का गठन किया।
फ्रांको-प्रशियन युद्ध, 1870–71: बिस्मार्क ने फ्रांसीसी शत्रुता का उपयोग दक्षिण जर्मन राज्यों को प्रशा के साथ जोड़ने के लिए किया।
साम्राज्य की घोषणा, 1871: वर्साय के दर्पण कक्ष में जर्मन साम्राज्य की घोषणा की गई, जो जर्मन विजय और फ्रांस के अपमान दोनों का प्रतीक था।
जर्मनी का एकीकरण आदर्शवादी था, क्योंकि इसने जर्मन-भाषी लोगों की राष्ट्रीय एकता की आकांक्षा को पूरा किया। इसने राजनीतिक विखंडन समाप्त किया, आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा दिया और एक शक्तिशाली राष्ट्रीय राज्य का निर्माण किया।
परंतु यह एकीकरण लोकतांत्रिक सहमति या उदार संवैधानिकता के माध्यम से प्राप्त नहीं हुआ। फ्रैंकफर्ट संसद असफल हो चुकी थी और अंतिम एकीकरण प्रशियाई राजतंत्र, सेना और नौकरशाही द्वारा ऊपर से किया गया। जनता के राष्ट्रवाद को राज्य-शक्ति के उपकरण के रूप में प्रयोग किया गया।
इस प्रकार जर्मन एकीकरण में स्पष्ट अंतर्विरोध दिखाई देता है: लक्ष्य राष्ट्रीय एकता था, लेकिन साधन युद्ध, कूटनीति, चालाकी और सैन्यवाद थे। इसने एक राष्ट्र तो बनाया, परंतु पूर्ण उदार-लोकतांत्रिक राष्ट्र-राज्य नहीं बनाया।
यूरोपीय शक्ति-संतुलन में परिवर्तन: मध्य यूरोप में एक शक्तिशाली जर्मन साम्राज्य के उदय ने ऑस्ट्रिया, फ्रांस और ब्रिटेन पर आधारित पुराने शक्ति-संतुलन को बदल दिया।
ऑस्ट्रिया का पतन: 1866 के बाद ऑस्ट्रिया जर्मन मामलों से बाहर हो गया और धीरे-धीरे उसका ध्यान बाल्कन क्षेत्र की ओर मुड़ गया।
फ्रांस का अपमान: फ्रांको-प्रशियन युद्ध के बाद फ्रांस ने एल्सास-लोरेन खो दिया, जिससे उसमें प्रतिशोध की गहरी भावना पैदा हुई।
सैन्यवाद का उदय: जर्मन सफलता ने इस धारणा को मजबूत किया कि युद्ध और सैन्य शक्ति राष्ट्रीय नीति के प्रभावी साधन हो सकते हैं।
गठबंधन राजनीति: जर्मनी के उदय ने यूरोप में जटिल गठबंधन व्यवस्थाओं को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर प्रथम विश्व युद्ध से पहले तनावों को बढ़ाया।
नया यूरोपीय क्रम: जर्मनी एक प्रमुख औद्योगिक, सैन्य और कूटनीतिक शक्ति बन गया, जिसने 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध की यूरोपीय राजनीति की दिशा बदल दी।
इस प्रकार, जर्मनी का एकीकरण 19वीं शताब्दी के राष्ट्रवाद की एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी। इसने जर्मन एकता की आकांक्षा को पूरा किया और यूरोप के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र-राज्यों में से एक का निर्माण किया।
फिर भी इसकी पद्धति यथार्थवादी राजनीति, युद्ध और प्रशियाई सैन्यवाद पर आधारित थी। इसलिए जर्मन एकीकरण राष्ट्रवाद के आदर्श और शक्ति-राजनीति की वास्तविकताओं के बीच अंतर्विरोध का उत्कृष्ट उदाहरण है। इसके अंतरराष्ट्रीय परिणामों ने यूरोप की राजनीति को पुनर्गठित किया और भविष्य की प्रतिद्वंद्विताओं की नींव रखी।
मुख्य विचार: जर्मनी का एकीकरण राष्ट्रवाद के नाम पर हुआ, लेकिन उसके साधन शक्ति, कूटनीति और युद्ध थे।