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GS-1 • 2023
15 marks • 250 words

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15 Marks • 250 Words
जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का मूल्यांकन कीजिए।
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Syllabus: Redrawal of national boundaries. 15 marks 250 words 7 min focus timer
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HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

ऑटो वॉन बिस्मार्क, प्रशा का प्रधानमंत्री, जर्मनी के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाने वाला राजनेता था। 1871 से पहले जर्मनी कोई एकीकृत राष्ट्र-राज्य नहीं था, बल्कि 1815 की वियना कांग्रेस के बाद बने शिथिल जर्मन परिसंघ के अंतर्गत अनेक जर्मन-भाषी राज्यों का समूह था।

हालांकि, बिस्मार्क ने शून्य से कार्य नहीं किया। जर्मन एकीकरण की नींव पहले ही प्रशा के पूर्ववर्ती शासकों ने तैयार कर दी थी, जिन्होंने प्रशा को एक अनुशासित, सैन्यीकृत, प्रशासनिक रूप से कुशल और आर्थिक रूप से उभरती हुई शक्ति में बदल दिया था। बिस्मार्क ने इसी तैयार आधार और जर्मन राष्ट्रवाद की भावनात्मक शक्ति को Realpolitik, कूटनीति, सैन्य सुधारों और तीन सुनियोजित युद्धों के माध्यम से एक व्यावहारिक राजनीतिक परियोजना में बदल दिया।

मुख्य भाग: जर्मनी के एकीकरण में बिस्मार्क की भूमिका का मूल्यांकन

फ्लो चार्ट: प्रशियाई आधार से जर्मन एकीकरण तक

प्रशियाई आधार

पूर्ववर्ती शासक

सशक्त राज्य
सेना, नौकरशाही
अनुशासन

बिस्मार्क की Realpolitik

कूटनीति
शत्रुओं को अलग-थलग करना
शक्ति-राजनीति

तीन युद्ध

डेनमार्क, 1864
ऑस्ट्रिया, 1866
फ्रांस, 1870–71

परिणाम: 1871 में वर्साय में प्रशियाई नेतृत्व के अंतर्गत जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई। 

1. बिस्मार्क से पहले प्रशियाई आधार

बिस्मार्क ने शून्य से कार्य नहीं किया। जर्मन एकीकरण का आधार पहले ही प्रशा के पूर्ववर्ती शासकों ने तैयार कर दिया था, जिन्होंने प्रशा को एक अनुशासित, सैन्यीकृत और प्रशासनिक रूप से कुशल राज्य में बदल दिया था।

  • महान निर्वाचक फ्रेडरिक विलियम: उसने एक सशक्त केंद्रीकृत प्रशियाई राज्य की प्रारंभिक नींव रखी और स्थायी सेना का विकास किया।

  • फ्रेडरिक विलियम प्रथम, “सैनिक राजा”: उसने प्रशा को अत्यधिक सैन्यीकृत राज्य में बदल दिया। उसने सेना, नौकरशाही, अनुशासन और कर-व्यवस्था को मजबूत किया। उसके शासन में सेना प्रशियाई राज्य की रीढ़ बन गई।

  • फ्रेडरिक महान: उसने विशेष रूप से सिले시아 की प्राप्ति के माध्यम से प्रशियाई शक्ति का विस्तार किया और प्रशा को एक प्रमुख यूरोपीय शक्ति के रूप में स्थापित किया।

  • 19वीं शताब्दी के प्रशियाई सुधार: नेपोलियन काल के बाद प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक सुधारों ने प्रशा को और मजबूत किया। 1834 के जॉलवेराइन ने आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा दिया और प्रशा को जर्मन राज्यों का स्वाभाविक नेता बनने में सहायता दी।

  • विलियम प्रथम, रून और मोल्टके: एकीकरण से ठीक पहले राजा विलियम प्रथम, युद्ध मंत्री रून और जनरल मोल्टके के अधीन हुए सैन्य सुधारों ने बिस्मार्क को “रक्त और लौह” की नीति के लिए आवश्यक सैन्य साधन उपलब्ध कराया।

इसलिए बिस्मार्क जर्मन शक्ति का अकेला निर्माता नहीं था। उसे एक सशक्त प्रशियाई राज्य, कुशल नौकरशाही, अनुशासित सेना और बढ़ती हुई औद्योगिक अर्थव्यवस्था विरासत में मिली। उसकी महानता इस तैयार आधार का सही ऐतिहासिक क्षण पर जर्मनी के राजनीतिक एकीकरण के लिए उपयोग करने में थी।

2. बिस्मार्क की Realpolitik की नीति

बिस्मार्क यह नहीं मानता था कि जर्मन एकता उदारवादी भाषणों, संसदीय बहसों या नैतिक अपीलों से प्राप्त की जा सकती है। उसने Realpolitik की नीति अपनाई, जिसका अर्थ है—शक्ति, राष्ट्रीय हित, कूटनीति और सैन्य शक्ति पर आधारित व्यावहारिक राजनीति।

उसकी प्रसिद्ध “रक्त और लौह” की नीति इस विश्वास को व्यक्त करती थी कि युग के बड़े प्रश्न प्रस्तावों से नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति और निर्णायक कार्रवाई से हल होंगे।

3. बिस्मार्क की कूटनीतिक दक्षता

बिस्मार्क की सबसे बड़ी शक्ति यह थी कि वह प्रत्येक संघर्ष से पहले अपने शत्रुओं को अलग-थलग कर देता था। उसने सुनिश्चित किया कि प्रशा को किसी संयुक्त यूरोपीय विरोध का सामना न करना पड़े। ऑस्ट्रिया से युद्ध से पहले उसने फ्रांस और रूस की तटस्थता सुनिश्चित की तथा इटली का समर्थन प्राप्त किया। फ्रांस से युद्ध से पहले उसने फ्रांसीसी आक्रामकता का उपयोग दक्षिण जर्मन राज्यों को प्रशा के साथ जोड़ने में किया।

इस प्रकार बिस्मार्क ने यूरोपीय प्रतिद्वंद्विताओं को अवसर में बदला और कूटनीति को राष्ट्रीय एकीकरण का शक्तिशाली साधन बना दिया।

4. तीन युद्ध और एकीकरण की पूर्णता

  • डेनिश युद्ध, 1864: प्रशा और ऑस्ट्रिया ने डेनमार्क को पराजित कर श्लेसविग और होल्स्टीन पर नियंत्रण प्राप्त किया। इससे जर्मन मामलों में प्रशा की स्थिति मजबूत हुई।

  • ऑस्ट्रो-प्रशियन युद्ध, 1866: प्रशा ने ऑस्ट्रिया को पराजित किया और उसे जर्मन राजनीति से बाहर कर दिया। इसके बाद 1867 में प्रशियाई नेतृत्व में उत्तर जर्मन परिसंघ का गठन हुआ।

  • फ्रांको-प्रशियन युद्ध, 1870–71: बिस्मार्क ने फ्रांसीसी शत्रुता का उपयोग जर्मन राष्ट्रीय एकता उत्पन्न करने के लिए किया। दक्षिण जर्मन राज्य प्रशा से जुड़ गए और 1871 में जर्मन साम्राज्य की घोषणा हुई।

5. बिस्मार्क की भूमिका का सकारात्मक मूल्यांकन

  • उसने जर्मन राष्ट्रवाद की बिखरी हुई शक्ति को राजनीतिक दिशा दी।

  • उसने प्रशा को जर्मन राज्यों का स्वाभाविक नेता बना दिया।

  • उसने ऑस्ट्रिया को जर्मन मामलों से बाहर कर नेतृत्व के प्रश्न को हल किया।

  • उसने कूटनीति और युद्ध का अत्यंत सावधानीपूर्वक और सुनियोजित उपयोग किया।

  • उसने उदारवादियों के “नीचे से एकीकरण” के असफल प्रयासों के बाद “ऊपर से एकीकरण” को पूरा किया।

  • उसने जर्मनी को एक शक्तिशाली राष्ट्र-राज्य और प्रमुख यूरोपीय शक्ति में बदल दिया।

6. आलोचनात्मक मूल्यांकन और सीमाएँ

यद्यपि बिस्मार्क ने निर्णायक भूमिका निभाई, फिर भी जर्मनी के एकीकरण को केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं माना जा सकता। इसकी पृष्ठभूमि पहले ही प्रशा के पूर्ववर्ती शासकों, जर्मन राष्ट्रवाद, जॉलवेराइन, आर्थिक एकीकरण, प्रशियाई सैन्य शक्ति के विकास और ऑस्ट्रियाई प्रभाव के पतन से तैयार हो चुकी थी।

इसके अतिरिक्त, बिस्मार्क की पद्धति लोकतांत्रिक नहीं थी। एकीकरण जनता की सहमति के बजाय राजतंत्र, नौकरशाही और सेना के माध्यम से किया गया। इसने एक शक्तिशाली जर्मन राज्य तो बनाया, लेकिन साथ ही सैन्यवाद और अधिनायकवादी प्रवृत्तियों को भी मजबूत किया।

इसलिए बिस्मार्क जर्मन राष्ट्रवाद या प्रशियाई शक्ति का निर्माता नहीं था, बल्कि वह ऐसा राजनेता था जिसने दोनों को व्यावहारिक, राजनीतिक और सैन्य रूप दिया।

निष्कर्ष

इस प्रकार, बिस्मार्क जर्मनी के एकीकरण का मुख्य वास्तुकार था। उसकी Realpolitik, कूटनीतिक प्रतिभा, सैन्य रणनीति और प्रशा के नेतृत्व ने जर्मन एकता के स्वप्न को राजनीतिक वास्तविकता में बदल दिया।

फिर भी उसकी भूमिका का आलोचनात्मक मूल्यांकन आवश्यक है। उसने एकता की इच्छा या प्रशा की सैन्य-औद्योगिक शक्ति को पैदा नहीं किया; बल्कि उसने पूर्ववर्ती प्रशियाई शासकों द्वारा तैयार मजबूत आधार, विद्यमान राष्ट्रवाद, आर्थिक एकता और प्रशियाई शक्ति का उपयोग शक्ति-राजनीति के माध्यम से एकीकरण प्राप्त करने के लिए किया।

अतः बिस्मार्क को प्रशियाई शक्ति का निर्माता नहीं, बल्कि ऐसा राजनेता माना जाना चाहिए जिसने पूर्ववर्ती प्रशियाई शासकों द्वारा निर्मित सैन्य, प्रशासनिक और आर्थिक आधार का उपयोग जर्मनी के एकीकरण के लिए किया।

मुख्य विचार: बिस्मार्क ने जर्मन राष्ट्रवाद या प्रशियाई शक्ति को जन्म नहीं दिया; उसने दोनों को संगठित, निर्देशित और सैन्यीकृत करके एकीकृत जर्मनी का निर्माण किया।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies-I → History of the World
सामान्य अध्ययन-I → विश्व का इतिहास
Redrawal of national boundaries.
राष्ट्रीय सीमाओं का पुनर्निर्धारण।
Asked in: 2023 (1 PYQ)
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