आधुनिक संसदीय लोकतंत्र में विधायी, वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की मात्रा तथा जटिलता इतनी अधिक होती है कि पूरा सदन अकेले उनका प्रभावी ढंग से परीक्षण नहीं कर सकता। इसलिए संसदीय समितियों को संसद का अनिवार्य और उपयोगी साधन माना जाता है।
ये समितियाँ विस्तृत परीक्षण, सूचित विमर्श और कार्यपालिका पर प्रभावी नियंत्रण को संभव बनाती हैं। इसी संदर्भ में प्राक्कलन समिति बजट अनुमानों की जाँच करके सार्वजनिक व्यय में मितव्ययिता, दक्षता और प्रशासनिक सुधार के सुझाव देने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
धारा-दर-धारा
विषयवार
सावधानीपूर्वक परीक्षण
बेहतर अध्ययन
साक्ष्य-आधारित समीक्षा
सूचित सिफारिशें
जवाबदेही
वित्तीय अनुशासन
नीति-अनुवर्तन
सदन का समय बचता है
कार्यभार घटता है
परिणाम बेहतर होते हैं
संसद का कार्यभार कम करती हैं: सदन के पास समय सीमित होता है, इसलिए समितियाँ विषयों का विस्तृत परीक्षण कर केंद्रित रिपोर्ट प्रस्तुत करती हैं।
विस्तृत परीक्षण सुनिश्चित करती हैं: विधेयकों, बजट, नीतियों और प्रशासनिक कार्यों की जाँच पूर्ण सदन की बहस की तुलना में अधिक सावधानीपूर्वक की जा सकती है।
विमर्श की गुणवत्ता बढ़ाती हैं: समिति का कार्य सामान्यतः कम दलगत और अधिक विश्लेषणात्मक होता है, जिससे संतुलित सिफारिशें सामने आती हैं।
कार्यपालिका की जवाबदेही मजबूत करती हैं: मंत्रियों और विभागों का विशेष रूप से वित्तीय और प्रशासनिक मामलों में गहन परीक्षण होता है।
दक्षता को बढ़ावा देती हैं: समितियाँ संसद को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से कार्य करने में सहायता करती हैं।
प्राक्कलन समिति संसद की प्रमुख वित्तीय समितियों में से एक है। इसमें 30 सदस्य होते हैं, जो प्रत्येक वर्ष लोक सभा से आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणाली और एकल संक्रमणीय मत के माध्यम से चुने जाते हैं। कोई भी मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं हो सकता।
इसका कार्य केवल आँकड़ों की जाँच करना नहीं है, बल्कि यह देखना भी है कि सार्वजनिक धन को अधिक विवेकपूर्ण, मितव्ययी और दक्ष ढंग से कैसे खर्च किया जा सकता है।
बजट अनुमानों की जाँच: यह बजट में सम्मिलित अनुमानों का अध्ययन करती है और विस्तृत समीक्षा के लिए विशिष्ट मंत्रालयों या विभागों का चयन करती है।
व्यय में मितव्ययिता का सुझाव: यह अनावश्यक या अपव्ययी खर्च को कम करने के उपाय सुझाती है।
प्रशासनिक दक्षता में सुधार: यह विभागों के बेहतर संचालन के लिए संगठन, प्रक्रिया और प्रबंधन में सुधार के सुझाव देती है।
वैकल्पिक नीतियों की सिफारिश: यह किसी कार्यक्रम के उद्देश्यों को कम लागत या बेहतर परिणामों के साथ प्राप्त करने के बेहतर तरीके सुझा सकती है।
वित्तीय विवेकशीलता सुनिश्चित करना: यह बजट पारित होने के बाद भी सार्वजनिक व्यय पर संसद का नियंत्रण बनाए रखने में सहायता करती है।
प्राक्कलन समिति इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि यह नियमित वित्तीय स्वीकृति से आगे बढ़कर मितव्ययिता, दक्षता और सुधार पर ध्यान देती है। इस अर्थ में यह रचनात्मक वित्तीय नियंत्रण का साधन है।
हालांकि, इसकी भूमिका परामर्शात्मक होती है। यह अपनी सिफारिशों को सीधे लागू नहीं कर सकती और यह लोक लेखा समिति की तरह खातों की जाँच नहीं करती। फिर भी इसकी रिपोर्टें बेहतर शासन और विवेकपूर्ण व्यय का मार्गदर्शन करती हैं।
इस प्रकार, संसदीय समितियाँ प्रभावी संसदीय कार्यप्रणाली के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। वे संसद को अधिक सूचित, दक्ष और जवाबदेह बनाती हैं।
इसी ढाँचे में प्राक्कलन समिति बजट अनुमानों की जाँच करके सार्वजनिक प्रशासन में मितव्ययिता, दक्षता और सुधार की सिफारिश करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए यह वित्तीय निगरानी और उत्तरदायी शासन का एक महत्त्वपूर्ण साधन है।
मुख्य विचार: समितियाँ संसद को प्रभावी बनाती हैं; प्राक्कलन समिति सार्वजनिक व्यय को मितव्ययी, दक्ष और जवाबदेह बनाती है।