Home Quizzes Current Affairs Mains PYQs Saved Items
UPPSC
GS-3 • 2025
15 marks • 250 words

GS-3 • 2025

Back
15 Marks • 250 Words
“सुरक्षा विकास है और विकास सुरक्षा है।” भारत की सुरक्षा के परिप्रेक्ष्य में इनके सहजीवी संबंध का विश्लेषण कीजिए।
Attempt This PYQ
Write a timed answer first, then compare with model framework below.
Syllabus: India's internal security challenges: Terrorism, corruption, insurgency and organized crimes. 15 marks 250 words 7 min focus timer
Timer: 07:00
Model Answer Framework
हिंदी मॉडल उत्तर
HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

सुरक्षा का अर्थ है—संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, नागरिकों, संस्थाओं और राष्ट्रीय हितों की बाहरी, आंतरिक तथा गैर-पारंपरिक खतरों से रक्षा। विकास का अर्थ है—शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत संरचना, आजीविका, तकनीक और सुशासन के माध्यम से समावेशी सामाजिक-आर्थिक प्रगति।

“सुरक्षा विकास है और विकास सुरक्षा है” यह कथन दोनों के सहजीवी संबंध को स्पष्ट करता है। सुरक्षा विकास के लिए शांतिपूर्ण वातावरण बनाती है, जबकि विकास गरीबी, अलगाव और क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करके राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। भारत के लिए यह संबंध विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि भारत को आंतरिक, सीमावर्ती, समुद्री, साइबर और सामाजिक-आर्थिक सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

मुख्य भाग: भारत के संदर्भ में सुरक्षा-विकास संबंध

फ्लो चार्ट: सुरक्षा और विकास का सहजीवी संबंध

सुरक्षा ↔ विकास

सुरक्षा सक्षम बनाती है

शांति
निवेश
शासन-सेवा वितरण

विकास कम करता है

गरीबी
अलगाव
उग्रवाद

मानवीय सुरक्षा

भोजन
स्वास्थ्य
आजीविका

राष्ट्रीय सुरक्षा

स्थिरता
एकता
संप्रभुता

मुख्य संबंध: सुरक्षित वातावरण विकास को बढ़ावा देता है; समावेशी विकास स्थायी सुरक्षा का निर्माण करता है। 

1. सुरक्षा ही विकास है

सुरक्षा आर्थिक और सामाजिक प्रगति की न्यूनतम शर्त उपलब्ध कराती है। शांति, कानून-व्यवस्था और संस्थागत स्थिरता के बिना विकास परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया जा सकता।

  • निवेश और वृद्धि: सुरक्षित वातावरण घरेलू और विदेशी निवेश, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करता है।

  • सीमावर्ती विकास: सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा सड़क, संचार, व्यापार, पर्यटन और कल्याणकारी सेवाओं को संभव बनाती है।

  • आंतरिक स्थिरता: अशांत क्षेत्रों में शांति विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, बाजारों और शासन संस्थाओं को कार्य करने योग्य बनाती है।

  • समुद्री सुरक्षा: सुरक्षित समुद्री मार्ग भारत के व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और ब्लू इकोनॉमी के लिए आवश्यक हैं।

  • साइबर सुरक्षा: डिजिटल भुगतान, शासन, संचार और आर्थिक गतिविधियों के लिए डिजिटल आधारभूत संरचना की सुरक्षा आवश्यक है।

2. विकास ही सुरक्षा है

विकास स्वयं एक सुरक्षा रणनीति के रूप में कार्य करता है, क्योंकि यह असुरक्षा के मूल कारणों—गरीबी, बेरोजगारी, असमानता, आधारभूत संरचना की कमी और राजनीतिक अलगाव—को संबोधित करता है।

  • उग्रवाद को कम करता है: आजीविका, शिक्षा और संपर्क-सुविधाएँ विद्रोह, अलगाववाद और कट्टरपंथ की अपील को कम करती हैं।

  • राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करता है: सीमावर्ती, जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों का विकास अलगाव को कम करता है और राज्य में विश्वास को गहरा करता है।

  • मानवीय सुरक्षा को बेहतर बनाता है: भोजन, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शिक्षा नागरिकों को सुरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।

  • सामाजिक सद्भाव बढ़ाता है: समावेशी विकास क्षेत्र, जाति, धर्म या वर्ग पर आधारित सामाजिक तनावों को कम करता है।

  • राज्य की वैधता को मजबूत करता है: जब राज्य कल्याण और न्याय उपलब्ध कराता है, तो नागरिक संस्थाओं और सुरक्षा एजेंसियों के साथ अधिक सहयोग करते हैं।

3. भारत का सुरक्षा परिप्रेक्ष्य

भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ बहुआयामी हैं। इनमें बाहरी खतरे, सीमा विवाद, आतंकवाद, वामपंथी उग्रवाद, विद्रोह, समुद्री खतरे, साइबर हमले, जलवायु जोखिम और सामाजिक-आर्थिक असमानताएँ शामिल हैं। इसलिए भारत केवल सैन्य शक्ति पर निर्भर नहीं रह सकता; उसे सुरक्षा और विकास को जोड़ने वाली समग्र रणनीति की आवश्यकता है।

  • जम्मू-कश्मीर: सुरक्षा उपायों के साथ रोजगार, शिक्षा, आधारभूत संरचना और लोकतांत्रिक भागीदारी आवश्यक है।

  • उत्तर-पूर्व भारत: दीर्घकालिक शांति के लिए संपर्क-सुविधाएँ, व्यापार, सांस्कृतिक समावेशन और विकास आवश्यक हैं।

  • वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र: सड़क, विद्यालय, स्वास्थ्य सेवाएँ, आजीविका और भूमि अधिकार उग्रवादी प्रभाव को कमजोर करने में सहायता करते हैं।

  • सीमावर्ती क्षेत्र: आधारभूत संरचना, संचार और स्थानीय आजीविका विकास तथा क्षेत्रीय सुरक्षा दोनों को मजबूत करते हैं।

  • तटीय और द्वीपीय क्षेत्र: बंदरगाह विकास, तटीय पुलिसिंग, मछुआरों का कल्याण और समुद्री निगरानी एक-दूसरे के पूरक हैं।

4. संतुलित दृष्टिकोण की आवश्यकता

केवल सुरक्षा-आधारित दृष्टिकोण भय और अलगाव पैदा कर सकता है, जबकि केवल विकास-आधारित दृष्टिकोण वहाँ असफल हो सकता है जहाँ कानून-व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी हो। इसलिए भारत को संवेदनशीलता के साथ सुरक्षा और न्याय के साथ विकास के संतुलित मॉडल की आवश्यकता है।

  • शांति बहाल करने और नागरिकों की रक्षा के लिए सुरक्षा बलों का उपयोग।

  • कल्याण, न्याय और मूलभूत सेवाओं की त्वरित उपलब्धता सुनिश्चित करना।

  • स्थानीय भागीदारी और विश्वास-निर्माण को बढ़ावा देना।

  • आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को मजबूत करना।

  • डिजिटल, समुद्री, पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा करना।

निष्कर्ष

इस प्रकार सुरक्षा और विकास अलग-अलग लक्ष्य नहीं हैं; वे राष्ट्र-निर्माण के परस्पर सुदृढ़ करने वाले दो स्तंभ हैं। सुरक्षा वह वातावरण देती है जिसमें विकास संभव होता है, जबकि विकास स्थायी सुरक्षा के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियाँ तैयार करता है।

भारत के सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में यह संबंध अत्यंत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आज खतरे केवल सैन्य नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, तकनीकी और पर्यावरणीय भी हैं। इसलिए भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को समावेशी विकास, सशक्त संस्थाओं, सामाजिक न्याय और प्रभावी सुरक्षा तैयारी पर आधारित होना चाहिए।

मुख्य विचार: विकास सुरक्षा को स्थायी बनाता है और सुरक्षा विकास को संभव बनाती है।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies III → Internal Security Challenges
सामान्य अध्ययन III → आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां
India's internal security challenges: Terrorism, corruption, insurgency and organized crimes.
भारत की आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां: आतंकवाद, भ्रष्टाचार, विद्रोह और संगठित अपराध।
Asked in: 2025 (1 PYQ)
Related Current Affairs
No current-affairs links yet.