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UPSC
GS-1 • 2019
10 marks • 150 words

GS-1 • 2019

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10 Marks • 150 Words
मैंग्रोवों के रिक्तीकरण के कारणों पर चर्चा कीजिए और तटीय पारिस्थितिकी का अनुरक्षण करने में इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।(150 शब्दों में उत्तर दीजिए)
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Write a timed answer first, then compare with model framework below.
Syllabus: Geographical features and location-changes in critical geographical features (including water-bodies and ice-caps). 10 marks 150 words 7 min focus timer
Timer: 07:00
Model Answer Framework
हिंदी मॉडल उत्तर
HI
परिचय (Introduction)

1 भूमिका

मैंग्रोव लवण-सहिष्णु तटीय वन होते हैं, जो ज्वारीय क्षेत्रों, मुहानों और डेल्टाओं में पाए जाते हैं। ये स्थल और समुद्र के बीच प्राकृतिक कड़ी के रूप में कार्य करते हैं। लेकिन बढ़ते मानवीय दबाव और पर्यावरणीय परिवर्तनों के कारण इनका क्षरण हो रहा है, जिससे तटीय पारिस्थितिकी और स्थानीय आजीविका पर खतरा उत्पन्न हो रहा है।

मुख्य भाग: मैंग्रोव क्षरण के कारण और तटीय पारिस्थितिकी में महत्त्व

फ्लो चार्ट: मैंग्रोव क्षरण और तटीय पारिस्थितिक महत्त्व

मैंग्रोव: तटीय हरित कवच

क्षरण के कारण

तटीय विकास: बंदरगाह, सड़कें, पर्यटन और भूमि पुनरुद्धार
एक्वाकल्चर का दबाव: झींगा पालन और आर्द्रभूमियों का रूपांतरण
प्रदूषण और दोहन: औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज और ईंधन लकड़ी का संग्रह
जलवायु दबाव: समुद्र-स्तर वृद्धि, चक्रवात और लवणता में परिवर्तन

तटीय पारिस्थितिकी में महत्त्व

जैव-कवच: चक्रवात, लहरों और तूफानी ज्वार के प्रभाव को कम करता है
तटीय स्थिरता: तटीय कटाव को रोकता है और अवसादों को फँसाता है
नर्सरी क्षेत्र: मछलियों, केकड़ों, झींगों और पक्षियों को सहारा देता है
ब्लू कार्बन सिंक: कार्बन का भंडारण करता है और जलवायु नियंत्रण में सहायता करता है
निष्कर्ष संबंध: मैंग्रोव क्षरण से तटीय सुरक्षा, जैव विविधता, आजीविका सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता कमजोर होती है। 

1. मैंग्रोव क्षरण के कारण

मैंग्रोव का क्षरण मुख्यतः मानवीय गतिविधियों और पर्यावरणीय दबावों के कारण हो रहा है। तटीय भूमि पुनरुद्धार, नगरीय विस्तार, बंदरगाह, पर्यटन अवसंरचना और झींगा पालन मैंग्रोव क्षेत्रों को व्यावसायिक भूमि उपयोग में बदल देते हैं।

उद्योगों और सीवेज से होने वाला प्रदूषण, ईंधन लकड़ी का अत्यधिक दोहन, मीठे पानी के प्रवाह में कमी, गाद जमाव, चक्रवात, समुद्र-स्तर वृद्धि और लवणता में परिवर्तन भी मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक कमजोर करते हैं।

2. तटीय पारिस्थितिकी को बनाए रखने में महत्त्व

मैंग्रोव चक्रवात, ज्वारीय लहरों, तूफानी ज्वार और तटीय कटाव के विरुद्ध प्राकृतिक जैव-कवच के रूप में कार्य करते हैं। इनकी घनी जड़ प्रणाली अवसादों को फँसाती है, तटरेखा को स्थिर करती है और जल की गुणवत्ता में सुधार करती है।

ये मछलियों, झींगों, केकड़ों और पक्षियों के लिए प्रजनन तथा नर्सरी स्थल के रूप में कार्य करते हैं, जिससे समुद्री जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को सहारा मिलता है। मैंग्रोव बड़ी मात्रा में ब्लू कार्बन का भंडारण भी करते हैं, जिससे जलवायु नियंत्रण और तटीय सहनशीलता में सहायता मिलती है।

निष्कर्ष

इस प्रकार, मैंग्रोव का संरक्षण केवल जैव विविधता के लिए ही नहीं, बल्कि आपदा सहनशीलता, जलवायु संतुलन, आजीविका सुरक्षा और सतत तटीय विकास के लिए भी आवश्यक है।

निष्कर्ष (Conclusion)

 

Syllabus Anchoring
General Studies I → Geophysical Phenomena and Geographical Features
सामान्य अध्ययन - I → भूभौतिकीय घटनाएं और भौगोलिक विशेषताएं
Geographical features and location-changes in critical geographical features (including water-bodies and ice-caps).
भौगोलिक विशेषताएं और उनका स्थान- महत्वपूर्ण भौगोलिक विशेषताओं (जल-निकायों और हिम-टोपियों सहित) में परिवर्तन।
Asked in: 2019 (1 PYQ)
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